Bal kavita

शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

भालू का साथी हाथी




भालू का साथी हाथी

भालू बंदर उछल- कूद
कर खेल रहे थे बन में।
हवा तेज  बहते  बहते
तूफान बनी कुछ क्षण में।
भागा हिरण चौकड़ी भरकर
खुली जगह पर आया।
भागे  सारे  बंदर,  मोटा-
भालू  भाग  न  पाया।

भालू मामा उतरे गड्ढे में
ताकी बच जाएं।
गिरा पेड़ इक वहीं, फॅ॑से
नीचे वे निकल न पाए।
जुटे जानवर उन्हें बचाने की
सब युक्ति लगाई।
भारी पेड़ हटाने की सब
कोशिश काम ना आई।

आया  शेर कहा पंजे की
ताकत मैं दिखलाऊॅ॑।
पेड़ हटाकर मैं भालू को
पल में बाहर लाऊॅ॑।
पेड़ दूर की बात एक
डाली भी हटा न पाया।
तबियत का फिर किया-
बहाना पीछे लौट के आया।

भालू  ने  सबसे कहकर
फिर हाॅ॑थी को  बुलवाया।
अपना  खाना  छोड़ के
हाॅ॑थी दौड़ा दौड़ा आया।
पकड़  सूंड़  से  अपने
उसने भारी पेड़ उठाया।
भालू मामा को संकट से
उसने   आज   बचाया।


इसी प्रकार हाॅ॑थी के पराक्रम से भालू के प्राणों की रक्षा हुई। भालू और सभी जानवरों ने हाथी को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया।

इससे हमें यह सीख मिलती है कि--
१)हमें संकट के समय एक-दूसरे की रक्षा करनी चाहिए।

२) आवश्यकता पड़ने पर जो  काम आए वही सच्चा मित्र होता है।

हरिशंकर पाण्डेय "सुमित"

बाल कविताएं पढ़िए, आनंद लीजिए और सुनाइए।

होली -- जंगल की अनोखी होली



जंगल में होली

उड़े जंगल में रंग देखो  होली का।
देखो प्यारा तमाशा हमजोली का।

बंदर  ले   पिचकारी   आया
भालू पर  सब रंग  बरसाया
एक   रंगीला   चीता  आया
रंग गुलाल  गोरिल्ला  लाया

मजा देखो ये हिरणों की टोली का
उड़े जंगल में रंग देखो  होली का।
देखो प्यारा तमाशा हमजोली का।

हाथी राजा  झूम के  आए
सूड़ से अपने  रंग बरसाए
बाघ सियार भेड़िया  धाये
लेकिन रंग से बच ना पाए

नशा छाया है  भांग की गोली का
उड़े जंगल में रंग देखो  होली का।
देखो प्यारा तमाशा हमजोली का।

भालू  करता   ता-ता  थइया
साथ  में  नाचे  बंदर   भइया
कोयल निकली बड़ी गवइया
नाचे  मोर  आम  की  छइयां

बज रहा ढोल ढम ढम ढम ढोली का
उड़े जंगल में रंग देखो  होली का।
देखो प्यारा तमाशा हमजोली का।

हरिशंकर पांडेय "सुमित"

     

चंदामामा



प्यारे चंदा मामा









छोटी बच्ची चंदा मामा से पूंछती है-----

चंदा  मामा    चंदा  मामा
मुझको   यह   बतलाओ।
क्या तुम कोई जादूगर हो
मुझको  यह   समझाओ?

पहले  कुछ दिन  घटते  जाते
फिर तुम क्यों गायब हो जाते?
रात अंधेरी   क्यों  कर  जाते
कहाॅ॑  चाॅ॑दनी  को  ले   जाते?

छोटे बनकर फिर तुम आते
रोज - रोज  तुम बढ़ते जाते।
फिर बन जाते  गोल मटोल
चमक चाॅ॑दनी की अनमोल।

यह सुन  चंदा मामा  बोले,
राज जादुई फिर वो खोले।

मुझे रोशनी    सूरज  देता,
उसे चाॅ॑दनी  मैं   कर लेता।
जितनी मुझे रोशनी मिलती,
उतनी  मेरी  काया  दिखती।

छोटी बच्ची:---

कभी न हिम्मत हारे मामा।
लगते  सबसे  न्यारे  मामा।
सबसे बड़े    सितारे मामा।
सब  बच्चों के प्यारे मामा।


हरिशंकर पाण्डेय "सुमित"